उत्तर भारत की नदियों पर मंडराने लगा खतरा

By | February 14, 2019

(मोहन भुलानी ) हिमालय से निकलने वाली नदियों के उद्गम स्रोत के पिघलने और सन 2100 तक हिंदुकुश के ग्लेशियरों के दो तिहाई हिस्से के समाप्त हो जाने की खबर डराती है। इससे स्वाभाविक ही उत्तर भारत की नदियों पर खतरा मंडराने लगा है। कितने दुख की बात है कि जिन नदियों की बदौलत मानव-सभ्यता फली-फूली, उनका दम घोंटने के लिए मानव ही आमादा है। हिमालय से निकलने वाली नदियों के उद्गम स्रोत के सूख जाने के बाद पैदा होने वाली स्थिति की कल्पना मात्र से ही मन-मस्तिष्क सिहर उठता है। इससे पूरे उत्तर भारत में भयंकर सूखे की स्थिति पैदा होगी और अन्न-उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होगा। करोड़ों लोगों के सामने पीने के पानी का अभाव पैदा हो जाएगा। हमारे नीति-नियंताओं को समझना चाहिए कि कथित विकास और सड़क चौड़ीकरण के नाम पर नाजुक हिमालयी पारिस्थितिकी को छेड़ना त्रासद स्थिति पैदा कर देगी, इन सबसे हमें बचना चाहिए। हमें पृथ्वी को और अधिक गरम होने से बचाने के लिए हरसंभव प्रयत्न करना ही होगा, तभी मानव-सभ्यता बची रह सकेगी।

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