नशा तस्करों के काले कारनामों से अल्मोड़ावासी है परेशान

अल्मोड़ा: पिछले कई सालों से खाकी को दगा देकर तस्करी का खेल खेल रहे तस्करों के लिए पहाड़ की शांत वादियां उनके काले कारनामों के लिए मुफीद साबित हो रही है। खाकी जहां मुखबिरी की सूचनाओं से कुछ तस्करों को पकड़कर अपनी पीठ थपथपा रही है वहीं तस्करों का जबर्दस्त नेटवर्क मादक पदार्थो की खुलकर तस्करी कर रहा है।

अल्मोड़ा जिले की बात करें तो इस जिले का कुछ हिस्सा पौड़ी, चमोली और नैनीताल जिले की सीमाओं से सटा हुआ है। इन जिलों के सीमावर्ती क्षेत्रों में गांजे का उत्पादन भारी मात्रा में होता है। यहां के लोगों की कमजोर आर्थिक स्थिति का फायदा उठाकर तराई क्षेत्रों के तस्कर उन्हें इन मादक पदार्थो के उत्पादन की ओर धकेल रहे हैं और उन्हें लालच देकर नशीले पदार्थो का करोड़ों रुपये का खेल खेल रहे हैं। इन क्षेत्रों में दिल्ली, हरिद्वार, मुरादाबाद, काशीपुर, बिजनौर, रामनगर और अन्य तराई क्षेत्रों के तस्करों ने अपनी गहरी पैठ जमा रखी है। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण तस्कर अलग- अलग जिलों की सड़कों से यहां पहुंचते हैं और सीमावर्ती क्षेत्रों में लुकाछिपी कर अपने काले कारनामों को अंजाम देते हैं। पिछले दो तीन सालों में हालांकि पुलिस ने लाखों रुपये के गांजे की बरामदगी की है। लेकिन वास्तविकता यह है कि तस्करों के नेटवर्क को तोड़ने में पुलिस अब भी नाकाम साबित हो रही है।

Category: भड़ास

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