रुद्रपुर के RTO कार्यालय में टैक्स के नाम पर लाखों का घोटाला

By | January 31, 2019

रुद्रपुर : एआरटीओ कार्यालय में वाहन कर जमा करने के नाम पर लाखों का घोटाला सामने आया है। जांच में पता लगा है कि दलाल एआरटीओ कार्यालय के लाल बने हुए थे। बाबुओं की मिलीभगत से वाहन स्वामियों को फर्जी बारकोड युक्त रसीद थमाई जा रही थी। इसका खुलासा एक वाहन स्वामी की शिकायत पर हुआ। बड़ा सवाल यह है कि कार्यालय के बार कोड को किस तरह से स्कैन किया गया और किस तरह से फर्जी रसीद तैयार की गई। फिलहाल वर्ष 2016 से खेले जा रहे इस खेल में कई के फंसने की उम्मीद है।

एआरटीओ कार्यालय में बस व ट्रक मालिकों को वार्षिक, तिमाही वाहन कर जमा करना होता है। अलग-अलग कैटेगरी में यह निर्धारित होता है। बीते दिनों नगर के ही बस मालिक ने शिकायत दर्ज करा कहा कि उसे विभाग से नोटिस पर नोटिस दिए जा रहे हैं, जबकि उनका पूरा कर जमा है। एआरटीओ पूजा नयाल ने मामले की जांच कराई तो उनके होश फाख्ता हो गए। पता चला कि रसीद पर अंकित राशि कुल जमा से कम है। रसीद पर अंकित बार कोड को स्कैन किया तो वह फर्जी निकला। जबकि रसीद ओरिजनल की हूबहू थी। जांच में कम से कम 30 बड़े वाहनों की ऐसी फर्जी पर्चियां पाई गईं। कितनी राशि और कितने वाहनों के कर में गड़बड़झाला है, यह तो जांच में ही साफ हो सकेगा, लेकिन इस राशि के लाखों में होने का अनुमान है।

कार्यालय के लाल हैं बाहर बैठे दलाल

एआरटीओ कार्यालय के बाहर दलालों का जमावड़ा लगा रहता है। इनकी कारों के अंदर छोटी-छोटी चाइना मेड फोटोकापी मशीनें लगी हैं। लाइसेंस बनवाने से लेकर परमिट बनाने व रिन्यूवल कराने का ठेका ये दलाल लेते हैं। बीते दिनों मंडी परिषद के अध्यक्ष गजराज बिष्ट के प्रतिनिधि से भी दलालों ने लर्निंग लाइसेंस बनाने के नाम पर 3500 रुपये ले लिए। इसकी शिकायत एआरटीओ पूजा नयाल से की गई तो उन्होंने कहा कि आनलाइन आवेदन प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी का अंदेशा नहीं है। लोगों को जागरूक होना होगा। काम जल्द कराने के एवज में किसी किसी प्रलोभन में आने की जरूरत नहीं है। इंसेट ———–

पूर्व में डीएम कर चुके कार्रवाई1पूर्व में डीएम ने एआरटीओ कार्यालय के बाहर छापामार अभियान चला दलालों को खदेड़ा था। इसके बाद से एआरटीओ कार्यालय के चैनल पर ताला डाला जाने लगा। लेकिन कुछ दिनों के सन्नाटे के बाद बाबुओं की मिलीभगत से दलालों ने फिर अपनी दुकानें सजा लीं। हद यह है कि सब कुछ आंखों के सामने होते हुए भी एआरटीओ कार्यालय इन दलालों पर कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा रहा है। वर्जन —-

गड़बड़झाला पकड़ में आ गया है। वर्ष 2016 से यह खेल खेला जा रहा है। इस दौरान जो वाहन कर लोगों ने जमा किया है, उसमें रसीद पर जो राशि दर्ज है, विभाग के कंप्यूटर पर आनलाइन यह राशि आधी ही दिख रही है। जांच की जा रही है, जल्द ही असलियत सामने होगी। दोषी को किसी भी हाल में बक्शा नहीं जाएगा। –पूजा नयाल, एआरटीओ रुद्रपुर

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