जातीय समीकरणों में उलझी पौड़ी लोकसभा सीट, कांग्रेस को होगा फायदा !

By | April 1, 2019

( कैलाश जोशी अकेला ) : उत्तराखण्ड की पौड़ी लोक सभा सीट ओर नैनीताल लोक सभा सीट उत्तराखण्ड की भावी राजनीति को काफी हद तक प्रभावित कर सकती है। पौड़ी लोक सभा सीट हमेशा हॉट सीट मानी जाती रही है क्योंकि 1991 के वाद इस सीट पर मुख्यतः मुकाबला कांग्रेस से सतपाल महाराज और बीजेपी से भुवन चंद खण्डूरी के बीच रहा। लेकिन अब इस सीट पर राजनैतिक समीकरण बदल गये है भाजपा से पांच बार भुवन चंद खण्डूरी तथा कांग्रेस से दो बार सतपाल महाराज इस सीट पर सांसद रह चुके है लेकिन इस बार के चुनाव में दोनों दिग्गज चुनावी मैदाने जंग में नहीं है।

मनीष खण्डूरी के कांग्रेस में शामिल होने से पहले राजनैतिक हलकों में यह सीट भाजपा के पाले में जाने की चर्चा इसलिय जोरो पर थी क्योंकि कांग्रेस के पाले में कोई बड़ा या जिताऊ प्रत्याक्षी नजर नही आ रहा था। लेकिन भुवन चंद खण्डूरी के पुत्र मनीष खण्डूरी के कांग्रेस पाले में जाने से मुकाबला काफी रोचक हो गया है।
गढ़वाल लोक सभा सीट पर ब्राह्मण वोट हेमवती नंदन बहुगुणा के बाद खण्डूरी के कारण भाजपा के साथ खड़ा रहता था इसलिए एक मुस्त ब्राह्मण तथा सैनिक वोटों के कारण भाजपा का पलड़ा हमेशा भारी रहता था। भाजपा के समर्थक राहुल गाँधी को चाहे जितनी बार पप्पू कहे लेकिन राहुल ने ऐसी मनीष खंडूरी नामक ऐसी गुगली फेंकी है कि जिससे भाजपा के परम्परागत वोट बैंक पर बहुत बड़ी सेंध लगनी निश्चित है।

भाजपा के वोट बैंक का ग्राफ त्रिवेंद्र रावत के मुख्यमंत्री बनने से घटा है. त्रिवेंद्र रावत अभी तक दो साल में विकास का कोई भी मॉडल नहीं बना पाए है, सिर्फ जीरो टॉलरेंस के मन्त्र का जाप कर रहे है. जीरो टॉलरेंस में जिन भी दागियों को जेल भेजा उन्हें हाई कोर्ट जमानत दे चुका है. मुख्यमंत्री रहते हुए त्रिवेंद्र रावत का व्यवहार बहुत उदासीन तथा जनता के साथ तालमेल न बिठा पाना है वो सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी के नाम की माला जप रहे है तथा मोदी की तरह अपनी सुरक्षा तथा प्रचार तंत्र में ही मशगूल है. जनता की ख़ामोशी सत्ता के बिरुद्ध लग रही है.

भारतीय जनता पार्टी फिर भी बाजी पलट सकती थी लेकिन इस सीट पर तीर्थ सिंह रावत को चुनाव मैदान में उतारकर बीजेपी ने लगभग कांग्रेस के पाले में यह सीट दे दी है ऐसा राजनैतिक क्षत्रपों का अनुमान है, यदि पौड़ी सीट पर जातीय आधार पर बहुत ज्यादा वोट पड़ते है तो तीर्थ सिंह रावत इसमें पिछड़ जायंगे क्योंकि राजपूत समाज मे इनका चेहरा ओझिल है तथा वो अभी तक अपनी मजबूत पहचान में कामयाब नहीं रहे है. इसलिए वो कांग्रेस के वोट बैंक पर सेंध नहीं लगा पाएंगे।

तीर्थ सिंह रावत को भुवन चंद खण्डूरी का दत्तक पुत्र भी कहा जाता है, यदि तीर्थ सिंह रावत अग्रेसिव होकर खण्डूरी के खिलाफ कुछ बोलते है तो इसका नुकसान तीर्थ सिंह रावत को होना निश्चित है बोजेपी में जो राजपूत क्षत्रप है उनके साथ तीर्थ सिंह रावत का 36 का आंकड़ा है जिससे उनको नुकसान होने की संभावना है स्थानीय निकायों के चुनाव में भाजपा सभी बड़े नेताओं की विधान सभा मे विजय हासिल नही कर पाई थी. 2014 में जो मोदी लहर थी उसके कारण ही भाजपा के सभी नेता चुनाव जीत गये थे लेकिन अब परिस्थितियां भिन्न है। इसलिए मनीष खंडूरी का लोक सभा चुनाव में विजयी होना लगभग निश्चित है।

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