ग्राम पंचायत में पर्यावरण सुरक्षा की बैठक

रूद्रप्रयाग – ग्राम पंचायत क्यूडी के तोक ढौढ़िक में जल संवर्द्धन एवं पर्यावरण सुरक्षा के सन्दर्भ बैठक आयोजित की गयी। बैठक की अध्यक्षता निवर्तमान प्रधान श्री वीरपाल सिंह नेगी द्वारा की गई एवं बैठक में मुख्य अतिथि जिलाधिकारी  मंगेश घिल्डियाल एवं विशिष्ट अतिथि उपजिलाधिकारी रूद्रप्रयाग श्री बृजेश तिवाडी उपस्थित थे। बैठक में जल संवर्द्धन समिति का गठन किया गया।

रुद्रप्रयाग जिले में लोक पुरुषार्थ को जागृत एवं संगठित कर अपने संसाधनों के विकास, संरक्षण एवं उपयोग की एक महत्वपूर्ण कार्ययोजना पर काम शुरू हो गया है। लगातार सूखते जा रहे गधेरों, धारों को पुनर्जीवित कर, सदाबहार करने की जिलाधिकारी  मंगेश घिल्डियाल की मुहिम आकार लेने लगी है। इसके लिए संबंधित ग्रामीणों को जागरूक व संगठित करते हुए तथा उन्हीं की सक्रिय सहभागिता के लिए ग्रामीण समितियों का गठन किया गया है।

ये समितियां खंतियों, ताल-तलइयों का निर्माण कर उनके चारों तरफ उन्नत किस्म की घासों का रोपण करने के साथ ही गधेरे के दोनों ओर उपलब्ध भूमि पर चारापत्ती और अन्य स्थानीय उपयोग के वृक्षों का रोपण कर पानी, घास-चारा और ग्रामीण उद्यमों को कच्चा माल उपलब्ध कराने की बहुमुखी योजना का क्रियान्वयन करेंगी।

नैणीदेवी पर्वत शिखर से निकलकर अलकनंदा में विलीन होने वाला बौन्स्याड़ी गधेरा अपने तटवर्ती लगभग 2 दर्जन गाँवों की जलापूर्ति का मुख्य आधार रहा है। जनसंख्या और उसकी बढ़ती जरूरतों का बोझ झेलते यह गधेरा अब दम तोड़ने की कगार पर पहुँच गया है, जिससे पानी के साथ ही चारा व लकड़ी का संकट बढ़ता जा रहा है। देश और दुनिया में जल-संकट के समाधान के अभिनव प्रयासों को स्वयं ग्रामीण आगे बढ़ाएं, इस विचार से जिलाधिकारी ने जिले के गधेरों को सदाबहार बनाने की योजना बौंस्याड़ी गधेरे के कायाकल्प से आरम्भ की है।

इस योजना की विशेषता यह होगी कि कुछ दिशा-निर्देशों और मानकों के साथ स्थानीय ग्रामीण ही इसका क्रियान्वयन करेंगे, जिसमें उनके अनुभवजनित ज्ञान के साथ नवीन विज्ञान और प्रोद्यौगिकी का भी समन्वय होगा। इसके लिए नोडल एजेंसी सिंचाई विभाग को बनाया गया है लेकिन वह केवल वित्तीय एवं तकनीकी मार्गदर्शन तक सीमित रहेगी। कार्ययोजना का संचालन ग्राम स्तर पर गठित समितियां करेंगी।

इन समितियों का गठन भी जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने अपनी मौजूदगी में ग्रामीणों की बैठक आयोजित कर सर्वसम्मति से कराया है और उन्हें भरोसा दिया है कि उन्हें पूरा सहयोग एवं संरक्षण दिया जाएगा। समितियों का ब्यौरा देते हुए इस कार्यक्रम के संयोजक सतेंद्र सिंह भंडारी और नोडल अधिकारी प्रताप सिंह बिष्ट, अधिशासी अभियंता सिंचाई खंड रुद्रप्रयाग ने बताया कि इस कार्यक्रम से जुड़े गाँवों- क्वीली, कुरझण और ढोंढिक में उन्हीं गाँवों की महिला मंगल दल की अध्यक्ष के नेतृत्व में नदी जल संरक्षण एवं संवर्द्धन समितियां गठित की गई हैं।

इसके साथ ही तीनों गाँवों में 2-2 जरूरतमंद किन्तु कर्मठ महिलाओं को अल्प मासिक मानदेय पर कार्यक्रम रक्षक के रूप में सर्वसम्मति से चयनित किया गया है। सरकारी कार्यक्रमों को जनता की सहभागिता की बजाय जनता के कार्यक्रम को सरकारी सहभागिता से संचालित किये जाने वाले इस अभियान में चिपको आंदोलन के प्रणेता चंडीप्रसाद भट्ट, वृक्षमित्र जगत सिंह जंगली, मैती आंदोलन के प्रणेता कल्याण सिंह रावत, पाणी राखो आंदोलन के प्रणेता सच्चिदानंद भारती सहित अनेक पर्यावरणविदों एवं विशेषज्ञों का समर्थन और सहयोग भी प्राप्त हो रहा है।

वरिष्ठ पत्रकार रमेश पहाड़ी, जो इन  आंदोलनों से जुड़े और साक्षी रहे हैं, ने आशा जताई है कि अन्य आंदोलनों  की तरह ही यह आंदोलन भी जनांदोलन का रूप लेकर गधेरों के पुनर्स्थापन को एक नई दिशा देने में सफल होगा और उत्तराखंड अपने संसाधनों के विकास, संरक्षण एवं सम्यक् उपयोग की एक नई सीख देश व दुनिया को देने में सफल होगा।

बैठक में वरिष्ठ पत्रकार रमेश पहाड़ी, पूर्व प्रधान ग्राम पंचायत क्यूड़ी महेन्द्र सिंह नेगी, अधिशासी अभियन्ता सिंचाई विभाग  प्रताप सिंह बिष्ट, अधिशासी अभियन्ता सिंचाई खण्ड केदारनाथ  हुकुम सिंह रावत, जिला आपदा प्रबन्धन अधिकारी  हरीश चन्द्र शर्मा, जिला उद्यान अधिकारी योगेन्द्र सिंह चैधरी, प्रधानाध्यापक कोट मल्ला  सतेन्द्र भण्डारी, वरिष्ठ वैयक्तिक अधिकारी ओमप्रकाश बिष्ट, ग्रामीण  त्रिलोक सिंह नेगी, लक्ष्मण सिंह,  गिरधारी सिंह,  राजेन्द्र सिंह,  धूम सिंह,  लक्ष्मी देवी,  पुष्पा देवी,  सुमित्रा देवी,  भागरथी देवी,  मैणा देवी,  माहेश्वरी देवी सहित बडी संख्या ग्रामीण व अन्य विभागों के अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित थे।

Category: उत्तराखण्ड रुदयाप्रयाग

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