बेहतर सड़क सुविधा के सरकार के दावे हवा-हवाई साबित

गोपेश्वर: चमोली जिले के विभिन्न गांवों में मुख्य सड़क की सुविधा न होने से मरीजों की मुसीबतें कम नहीं हो रही हैं। स्यूंण के बाद अब डुमक गांव में एक मरीज को अस्पताल ले जाने के लिए ग्रामीणों को 14 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। ऐसे में बेहतर सड़क सुविधा के सरकार के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं।

डुमक गांव के लिए एक दशक पूर्व कुजौं मैकोट स्यूंण डुमक मोटर मार्ग को स्वीकृति मिली थी, लेकिन अभी तक इस सड़क का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। कुछ समय तक कार्य करने के बाद ठेकेदार ने भी निर्माण कार्य बंद कर दिया। सड़क स्वीकृत होने के बाद भी पैदल आवाजाही करना ग्रामीणों की नियति बन गया है। आज भी यहां के ग्रामीणों को 14 किमी पैदल आवाजाही करनी पड़ रही है। सड़क सुविधा न होने के कारण मरीजों को लाने में सबसे अधिक दिक्कतें हो रही है। डुमक गांव की 40 वर्षीय सुलोचना देवी पत्नी भगवान सिंह की तबीयत अचानक खराब हो गई। सड़क सुविधा न होने के कारण ग्रामीण महिला को कुर्सी की पालकी पर बैठाकर 14 किमी पैदल लाए। उसके बाद कुजौं में वाहन से बीमार महिला को अस्पताल पहुंचाया गया। डुमक गांव के आइएस सनवाल का कहना है कि गांव के लिए सड़क तो स्वीकृत है, लेकिन आज तक सड़क नहीं बन सकी। उनका कहना है कि सड़क निर्माण को लेकर कई बार ग्रामीण आंदोलन भी कर चुके हैं, लेकिन अधिकारी बेखबर बने हुए हैं।

Category: उत्तराखण्ड

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