अंधेरगर्दी : रिक्साल ग्राम पंचायत में प्रधान के लिए बिना ओबीसी के OBC महिला सीट

थलीसैण: पौड़ी गढ़वाल के विकास खंड थलीसैण के सीमान्त ग्राम पंचायत रिक्साल गांव में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में प्रधान पद के लिए जिला प्रशासन की ओर से ऐसा अरक्षण तय किया गया जिसको देखकर लगता है कि कहीं न कहीं गोलमाल और अंधेरगर्दी है। बताते चलें कि पौड़ी गढ़वाल के विकास खंड थलीसैण के सीमान्त ग्राम पंचायत रिक्साल में 2011 की जनगणना में मानवीय भूल के कारण 64 ब्यक्तियों न कि परिवारों को ओबीसी जाति दर्शाया गया है, जो कि बहुत बड़ी त्रुटि एवं गलत है। वास्तव में ग्राम पंचायत रिक्साल में सिर्फ दो ही परिवार राष्ट्रीय स्तर पर ओबीसी जाति के आधार पर दर्ज है।

पिछले 2014 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में 2011 की जनगणना के अनुसार ग्राम पंचायत रिक्साल में प्रधान पद का आरक्षण ओबीसी पुरुष किया गया था। प्रधान पद पर ग्राम पंचायत रिक्साल के ग्रामीण श्री बसवानन्द ममगाई द्वारा तत्कालीन जिलाधिकारी पौड़ी के पास आपति दर्ज कराई थी, तथा स्पष्ट तौर पर लिखित पत्र के माध्यम से बताया था कि ग्राम पंचायत रिक्साल में सिर्फ दो ही परिवार राष्ट्रीय स्तर पर ओबीसी जाति में शामिल हैं फिर 750 की जनसँख्या वाली पंचायत को प्रधान पद के लिए ओबीसी में आरक्षित करना बहुत बड़ी भूल हैं तथा इस भूल को तुरन्त सुधार कर दुरस्त किया जाना चाहिए।

उस समय तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा इस पर मजिस्टेृटी जांच की गई और पाया गया कि वास्तव में 2011 की जनगणना में मानवीय भूल के कारण 64 ओबीसी जाति के लोग दिखाये गये है जो कि प्रशासनिक स्तर पर बहुत चूक हैं उसके पश्चात फिर सीट को बदलकर प्रधान सामान्य पुरूष किया गया।

फिर एक बार दुबारा से उसी मानवीय भूल या प्रशासनिक त्रुटि को इस समय 2019 के पंचायत चुनाव में फिर से 2011 की जनगणना के अनुसार ग्राम पंचायत रिक्साल में प्रधान पद के लिए ओबीसी महिला सीट आवंटित की गई हैं। जिला प्रशासन द्वारा फिर मानवीय भूल या त्रुटि में कोई भी सुधार नहीं किया गया हैं । ग्रामीणों द्वारा आपति दर्ज करने के बाद भी आपत्ति का कोई निस्तारण नहीं किया गया और सीट यथावत रखी गई हैं।

बड़ी बात यह है कि आपति दर्ज करने के बाद सुधार नहीं किया गया। इससे साफ जाहिर होता है कि पंचायत राज विभाग के अधिकारी कर्मचारी और जिला प्रशासन दोनों की अनदेखी या मिलीभगत से आरक्षण का खेल खेला गया हैं!

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन पौड़ी मामले पर क्या सज्ञांन लेता है !

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