उत्तराखंड लाइवस्टॉक डेवलपमेंट बोर्ड के सीईओ पद पर नियुक्ति में धांधली

By | March 6, 2019

उत्तराखंड लाइवस्टॉक डेवलपमेंट बोर्ड (यूएलडीबी) के मुख्य अधिशासी अधिकारी (सीईओ) के पद पर नियुक्ति में धांधली किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। सीईओ के पद पर ऐसे अधिकारी को नियुक्त कर दिया गया जो उस पद की अनिवार्य अर्हता पूरी करता ही नहीं। कहा जा रहा है कि ऊंची राजनैतिक पहुंच के चलते उन्हें इतने महत्वपूर्ण पद पर नियमों को ताक पर रखते हुए नियुक्ति दी गई है। इतना ही नहीं नियुक्त किए गए अधिकारी का पूर्व में विवादों से नाता रहा है। उन पर पद के दुरुपयोग के आरोप हैं जिनकी जांच चल रही है।

बीते वर्ष मार्च माह में डा. कमल सिंह यूएलडीबी के सीईओ पद से सेवानिवृत्त हुए। उनके बाद इस पद पर डा. एमएस नयाल की नियुक्ति कर दी गई। इस नियुक्ति में नियमों को हासिये पर रखा गया। दरअसल, बोर्ड के ढांचे में दी गई व्यवस्था के मुताबिक यूएलडीबी के सीईओ पद पर वही व्यक्ति नियुक्त हो सकता है जिसके पास मास्टर ऑफ वेटेरिनरी (एनिमल रिप्रोडक्शन गायनोकोलॉजी एण्ड ओवसरेटरिक्स) की डिग्री हो। लेकिन डा. नयाल सिर्फ वेटेरिनरी की बैचलर डिग्री है। सबसे अहम बात है कि नयाल की नियुक्ति डीपीसी के बाद हुई बावजूद इसके इससे सम्बंधिम मानक दरकिनार कर दिए गए।

नयाल ने की 17 फर्जी नियुक्तियां

देहरादून। डा. एमएस नयाल इससे पहले हरिद्वार जिले में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के पद पर तैनात थे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने पद स्वीकृत न होने के बावजूद 17 कार्मिकों को संविदा पर नियुक्ति दी है। इन नियुक्तियों में बड़ा खेल हुआ। बाद में मामला उछला तो ये सभी नियुक्तियां रद्द कर दी गईं। मामले की अभी जांच चल रही है।

दवा खरीद में हुआ घोटाला !

देहरादून। हरिद्वार जिले में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी रहते हुए डा. एमएस नयाल ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर दवा और अन्य उपकरणों की खरीद का आर्डर दिया। उनका अधिकार तीन लाख रूपये तक की खरीद का था और उन्होंने साढ़े पांच लाख रूपये की खरीद के आर्डर दे दिये। मामले की जांच अभी तक चल रही है। हैरानी की बात यह है कि खरीद सामग्री विभाग को पहुंचाए बगैर सम्बंधित कम्पनी आज भी अपने भुगतान का दबाव बना रही है।

‘डा. नयाल की नियुक्ति विभागीय प्रक्रिया डीपीसी आदि को पूरी करते हुए की गई है। इसमें कैसे नियमों का उल्लंघन हो सकता है। रही बात उन पर लगे अन्य आरोपों की तो विधिवत शिकायत मिलने पर उनकी जांच की जाएगी। दोष पाए जाने पर कार्रवाई होगी’।

_ रेखा आर्य, पशुपालन मंत्री।

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