टिहरी बांध से पैदा होने वाली मीथेन गैस से फट रहे है बादल

टिहरी: वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक का दावा है कि बांध से पैदा होने वाली मीथेन गैस से गढ़वाल मंडल में बादल फटने की घटनाओं में इजाफा हो जाएगा. वैज्ञानिकों को माने तो उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में आने वाले समय में न सिर्फ एक बड़ा खतरा पैदा हो सकता है बल्कि पर्यावरण का संतुलन भी बिगड़ सकता है. आखिर क्या है यह गंभीर मामला…

बता दें कि टिहरी बांध दुनिया के पांचवे नंबर का सबसे गहरा और मानव निर्मित बांध है. जिसकी इलेक्ट्रिसिटी की पावर 2400 मेगावाट है. जिसके चलते टिहरी बांध से भारी मात्रा में मीथेन गैस निकल रहा है. टिहरी बांध के साथ ही दुनियाभर के अन्य बांधों से भी भारी मात्रा में मीथेन गैस निकल रहा है. गौरतलब है कि मीथेन गैस कार्बनडाइऑक्साइड से 25 गुना ज्यादा ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाता है, जोकि वातावरण के लिए हानिकारक है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि ज्यादा मात्रा में मीथेन गैस बादल फटने की घटना का मुख्य कारण हो सकता है. जिसपर फिलहाल शोध चल रहा है. सामान्य दिनों में बादल फटने की घटना होती है, या अचानक से ज्यादा बारिश हो जाती है तो वो भी इसी का ही असर होता है. साथ ही कहा कि टिहरी बांध से और दुनिया के अन्य मानव निर्मित बांध से कितना मीथेन गैस निकल रहा है, इस पर भी शोध चल रहा है.

वाडिया के वैज्ञानिक डॉ. समीर तिवारी ने कहा कि वर्तमान समय में बारिश का चक्र बदल गया है. ज्यादा नमी वाले क्षेत्र में कम बारिश हो रही है और कम नमी वाले क्षेत्र में ज्यादा बारिश हो रही है. पहले एक महीने में करीब 100 मिलीमीटर बारिश होती थी लेकिन बारिश का चक्र बदलने के बाद अब ऐसा चार दिन में हो रहा है.

डॉ. समीर तिवारी ने कहा कि एक साथ बहुत ज्यादा मात्रा में बारिश हो रही है. जिस वजह से हिमालय के पहाड़ों में दरारें पड़ने लगी हैं. क्योंकि भारी बारिश में पहाड़ ठंडे हो जाते है और फिर तेज धूप निकलने की वजह से दरारें पड़ने लग जाती हैं. इस वजह से लैंड स्लाइडिंग भी होती है.

समीर तिवारी ने कहा कि मीथेन गैस टिहरी बांध से छोटे-छोटे बुलबुले के रूप में निकलती है. इन बुलबुलों को ट्रैप करने की जरूरत है. लेकिन अगर इनको ट्रैप नहीं किया जाता तो ये ब्लास्ट हो जाते हैं और मीथेन गैस वातावरण में चला जाता है.

Category: राष्ट्रीय

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