पहाड़ों की तहसीलों में पड़ा SDM/तहसीलदारों का अकाल, जनता बेहाल

By | March 4, 2019

पौड़ी। जनपद पौड़ी भौगोलिक दृष्टि से उत्तराखंड का सबसे बड़ा जिला है, लेकिन इसका प्रशासनिक ढांचा आज भी भगवान भरोसे चल रहा है। सरकार ने जनपद में तहसीलें तो बना दी हैं, लेकिन वह एसडीएम के पदों का सृजन करना भूल गई। तहसीलदार के पद सृजित हैं, लेकिन तहसीलदार नहीं हैं। नायब तहसीलदार की नियुक्ति की स्थिति भी बेहतर नहीं कही जा सकती है। जनपद पौड़ी के प्रशासनिक ढांचे में 12 तहसीलें व एक उप तहसील है, जबकि एसडीएम के मात्र नौ पद सृजित हैं। इनमें सात तहसीलों के एसडीएम, एक अतिरिक्त परगना मजिस्ट्रेट व एक प्रोटोकॉल एसडीएम का पद शामिल है। तहसील पौड़ी, श्रीनगर, कोटद्वार, थलीसैंण, धुमाकोट, लैंसडौन व चौबट्टाखाल में एसडीएम के पद स्वीकृत हैं, जबकि तहसील सतपुली, बीरोंखाल, जाखणीखाल, चाकीसैंण व यमकेश्वर में एसडीएम के पदों का सृजन नहीं हुआ है। जनपद की तहसील यमकेश्वर ऐसी है, जहां एसडीएम का पद स्वीकृत नहीं होने के बावजूद एसडीएम नियुक्त है।

डीएम धीराज सिंह गर्ब्याल ने कहा कि उपजिलाधिकारियों के पदों का सृजन, एसडीएम, तहसीलदार की नियुक्ति को लेकर शासन से लगातार पत्राचार किया जा रहा है।

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