हत्या मामले में बागपत के तीन हत्यारों को आजीवन कारावास

विकासनगर:  31 दिसंबर 15 को उसका छोटा भाई सुरेंद्र राणा घूमने के इरादे से देहरादून आया था। जहां से परिचित संजीव राणा पुत्र दरियाव, अनिल राणा पुत्र रामफल, विजयवीर सिंह नीटू मास्टर, किरण पाल पुत्र महेंद्र, अरविंद कुमार, संजय पुत्र भोपाल सिंह, जितेंद्र पुत्र सुखबीर, चंदर पुत्र प्रकाश, कुलदीप शर्मा पुत्र सुरेश शर्मा निवासी ग्राम धनौरा सिल्वर नगर थाना बिनौली जिला बागपत उप्र, कुलदीप पुत्र रामनिवास निवासी सेक्टर 12 पंचकुला, हरियाणा हाल निवासी निर्मल निवास पंचकुला हरियाणा के साथ कालसी घूमने गया।

पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर दी थी। 13 जनवरी 16 को देवेंद्र सिंह राणा पुत्र महते ङ्क्षसह ने कालसी थाने में प्रार्थना पत्र दिया कि 31 दिसंबर 15 को उसका भाई सुरेंद्र राणा ग्राम धनौरा से अपनी बहन के यहां कैनाल रोड कोलागढ़ देहरादून आया था। जहां से पिकनिक के लिए दस परिचितों के साथ कालसी गया, लेकिन लौटा नहीं है।

बताया कि हाल ही में प्रधान व जिला पंचायत के चुनाव हुए थे, चुनाव में अनिल व संजीव का चाचा प्रधान का चुनाव लड़ा था। विजय वीर की पत्नी जिला पंचायत का चुनाव लड़ी थी। उन्होंने चुनावी रंजिश के चलते सुरेंद्र राणा की हत्या की आशंका जताई थी। पुलिस ने दस आरोपितों के खिलाफ हत्या, साक्ष्य मिटाने आदि धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।

कालसी थाने की पुलिस ने डाग स्कवाड, गोताखोरों की मदद से 13 जनवरी 16 को सुरेंद्र राणा का शव पिकनिक स्थल से एक किमी आगे नदी से बरामद किया। झाडिय़ों से पुलिस ने कपड़े बरामद किए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत गला घोटने व मृत्यु पूर्व चोट लगने से होना सामने आया।

कालसी में सभी ने खैरवा के पास नदी किनारे पिकनिक मनाई। पिकनिक मनाने गए सभी लौट आए, लेकिन सुरेंद्र नहीं लौटा। उसके साथ गए लोगों का कहना है कि सुरेंद्र वहां से कहीं चला गया है। इस प र आशंका जताई गई कि पिकनिक मनाने गए लोगों ने ही उसकी हत्या कर दी है।

अपर जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी नरेंद्र चंद बहुगुणा ने बताया कि राजकुमार राणा पुत्र महते ङ्क्षसह राणा निवासी ग्राम धनौरा सिल्वर नगर थाना बिनौली जिला बागपत उप्र ने 1 जनवरी 2016 को थाना कालसी में तहरीर दी थी। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नसीम अहमद ने हत्या के तीन दोषियों को आजीवन कारावास और साक्ष्य मिटाने के पांच दोषियों को तीन-तीन साल की सजा सुनाई। हत्या के दोषियों पर 25-25 हजार रुपये व साक्ष्य मिटाने वालों पर दस- दस हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर दोषियों को छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

 

Category: उत्तराखण्ड देहरादून

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