चम्पावत में वित्तीय प्रबंधन प्रणाली से शासकीय कार्यो में पारदर्शिता

चम्पावत ,एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली लागू होने से शासकीय कार्यो में पारदर्शिता,  समय की बचत, कार्यो में तेजी, स्पष्टता, पारदर्शिता, कोषागार भेजे जाने वाले बिल कार्यालय ही ऑन लाइन होने के साथ पेपर रहित व्यवस्था होगी। यह बात जिला सभागार में एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (आईएफएमएस) की एक दिनी कार्यशाला में बोलते हुए वरिष्ठ कोषाधिकारी हेमेन्द्र प्रकाश गंगवार ने कही।

उन्होंने कहा कि आईएफएमएस के माध्यम से टीए बिलों से लेकर सभी कार्य ऑन लाइन और आहरण-वितरण अधिकारी के कार्यालय से होंगे और आहरण वितरण अधिकारी को कोषागार के चक्कर नहीं लगाने होंगे। उन्होंने कहा कि आईएफएमएस पोर्टल पर कार्य करने के लिए कर्मचारी/अधिकारी के आधार नम्बर, कर्मचारी कोड नम्बर, मोबाइल नम्बर का प्रयोग करते हुए लॉगिन तैयार किया गया है जिसका प्रयोग कर कर्मचारी/अधिकारी पृथक-पृथक कार्यो का ऑनलाइन संपादन कर सकेंगे।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक कार्यालय में आईएफएमएस पोर्टल के संचालन हेतु मेकर (प्रारम्भिक कार्य करने वाले कर्मचारी/आपरेटर), चैकर (पर्यवेक्षक स्तर का कर्मचारी/अधिकारी) व ऑथराइजर/अप्रुवर (सक्षम स्वीकृता अधिकारी) त्रिस्तरीय यूजर बनाये जायेंगे।

श्री गंगवार ने बताया कि इस प्रणाली पर त्रिस्तरीय यूजर्स अपने-अपने पृथक-पृथक आईडी व ई-साईन का प्रयोग करके अपने से संबंधित दायित्वों का निर्वहन करेंगे और स्वयं की आईडी एवं ई-साईन के लिए उत्तरदायी होंगे। उन्होंने बताया कि पोर्टल पर कार्य करने हेतु राज्य एनआईसी द्वारा सरकारी ई-मेल उपलब्ध कराया जायेगा तथा व्यक्तिगत ई-मेल का प्रयोग पूर्णतः वर्जित होगा।

उन्होंने कहा है कि पोर्टल पर किसी भी कार्य से संबंधित आवेदन, फार्म, देयक, स्वीकृति आदेश आदि सिस्टम से ही जनरेट होंगे तथा ऐसे अभिलेख जिन्हें संलग्न करना अनिवार्य हो, उन सभी को स्कैन करके पोर्टल में अपलोड किया जायेगा तथा ऑन लाइन कार्य करने पर ‘‘आधार’’ आधारित ओटीपी की व्यवस्था होगी।
उन्होंने बताया कि पीएलए प्रशासक/आहरण वितरण अधिकारी द्वारा सिस्टम में ऑन लाइन कार्य से संबंधित समस्त देयकों, वाउचरों, प्राप्तियों के चालानों, ई-अभिलेखों की हार्ड प्रतियों को महालेखाकार के ऑडिट के प्रयोजन हेतु अभिरक्षित किया जाना जरूरी होगा।

कार्यालय में देयक तैयार करने से लेकर कोषागार/भुगतान एवं लेखा कार्यालय के लिए अप्रूव करने के मध्य सभी यूजरों के स्तर पर देयक केवल एक कार्य दिवस तक रोका जा सकेगा साथ ही माह के अंतिम सप्ताह में वेतन से भिन्न प्रकृति के देयकों को आहरण-वितरण अधिकारी से प्राप्त न करने की वर्तमान व्यवस्था समाप्त हो जायेगी और माह के प्रत्येक कार्य दिवस को देयक प्राप्त किये जा सकेंगे साथ ही बजट आवंटन की प्रक्रिया यथावत रहेगी। उन्होंने बताया कि कार्मिकों को स्वयं के क्लेम, अग्रिम, अवकाश, जीपीएफ, चिकित्सा प्रतिपूर्ति, यात्रा भत्ता, अवकाश यात्रा आदि को स्वयं ऑनलाइन करना होगा तथा कार्यालयाध्यक्ष इनका ऑनलाइन परीक्षण करेंगे।

श्री गंगवार ने कहा कि कार्मिकों की सेवा पुस्तिका, अभिलेख, नियुक्ति आदेश, पदोन्नति, पदावनति, निलम्बन, स्थानान्तरण, एलपीसी, समयमान वेतनमान, एसीपी, विभिन्न अग्रिम, कटौतियां, उपार्जित अवकाश आदि आवेदनों को स्कैन कर पीडीएफ फारमेट में अपलोड किया जायेगा तथा नियुक्ति से लेकर वर्तमान तक ऑनलाइन कर सेवा पुस्तिका तैयार होगी एवं सिस्टम से ही जीपीएफ पासबुक भी तैयार की जायेगी।

प्रशिक्षण में श्री गंगवार ने पेंशन प्रपत्रों को ऑन लाइन भरने, उसमें नाम, पता, ब्लड गु्रप आदि का इंद्राज सही-सही करने, जीपीएफ मेन्टेन प्रतिमाह करने तथा ऑन लाइन सर्विस बुक, पे-रोल, अंतिम वेतन प्रमाण-पत्र, अनुपूरक बिल, डाटा फिडिंग आदि की जानकारी दी। प्रशिक्षण में उप जिलाधिकारी लोहाघाट आरसी गौतम, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी जीडी पाण्डे, वित अधिकारी अमित सैनी, कोषागार के मुकेश डिमरी, अनिल कुमार सहित विभागों के लेखाकार, उपस्थित थे।

Category: उत्तराखण्ड

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